जिन नवजात बच्चों को प्रयागराज के लोगों ने अनचाहा समझ कर कभी नाले तो कभी कूड़े में फेक दिया था, उनका लालन-पालन राजकीय शिशु गृह में किया गया. आज ये बच्चे दो, तीन, चार व पांच साल के हो गए हैं. इनकी किस्मत देखिए कि जिन्हें अपनों ने ठुकरा दिया, वे लावारिस बच्चे अब इटली, स्पेन, अमेरिका, माल्टा और डेनमार्क में अपने नए अभिभावकों के घर नई जिन्दगी की शुरूआत करेंगे. बच्चों को गोद लेने की परम्परा के अन्तर्गत स्पेन, इटली, अमेरिका और माल्टा के लोगों ने प्रयागराज बाल शिशु गृह में पल रहे बच्चों को पसंद किया है. बाल शिशु गृह के 2 से 6 साल पांच बच्चे अब अपनी नई जिन्दगी की शुरुआत विदेश में करेंगे. उन्हें वहां नए माता-पिता मिलेंगे, अच्छी पढ़ाई और परवरिश मिलेगी. बाल शिशु ग्रह के जिन पांच बच्चों को विदेशी नागरिकों ने गोद लेने के लिए पसंद किया है, उनमें चार लड़के और एक लड़की है. इन मासूम बच्चों के पासपोर्ट बनने की प्रक्रिया चल रही है. पासपोर्ट बनने के बाद बच्चों को सौंपने की औपचारिकता पूरी होगी. जिसके बाद ये बच्चे नए नाम और अभिभावक के साथ अपनी नई जिन्दगी शुरू कर सकेंगे.

भारत में अब बच्चा गोद देने की प्रक्रिया सेंटर एडॉप्शन रिसर्च अथॉरिटी द्वारा की जाती है. इसमें बच्चे को गोद लेने के लिए आवेदन करने वालों की सख्त स्क्रीनिंग होती है, इसके बाद ही बच्चे को किसी को गोद दिए जाते हैं. स्क्रीनिंग के दौरान आवेदन, स्थायी और वर्तमान निवास, बच्चे को गोद क्यों लेना चाहते हैं, पुलिस वैरिफिकेशन आदि प्रक्रिया की जाती है. गोद देने के बाद भी संस्था की ओर से गोद दिए गए परिवार से लगातार सम्पर्क रखा जाता है ताकि बच्चे को किसी विषम परिस्थिति का सामना न करना पड़े.

बच्चों को गोद देने की मैपिंग दिल्ली से होती है. मैपिंग में प्रयागराज बाल शिशु ग्रह के पांच बच्चों को इटली, अमेरिका, माल्टा और स्पेन में रहने वाले लोगों ने गोद लेने की इच्छा जताई है. मैपिंग मंजूर हो गई और अब प्रयागराज के पांच मासूम विदेश में रहने जाएंगे और वहीं अपनी नई जिन्दगी शुरू करेंगे.

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