प्रयागराज: बलिया में साल 2013 में जब छह दिन का नवजात दिव्यांग लावारिस मिला था. 6 दिन के बच्चे का भविष्य क्या होगा, कोई नही बता सकता है. फिर वह मासूम 2013 में पहले वाराणसी फिर प्रयागराज आ गया और राजकीय बाल गृह में रहने लगा. अब उसकी उम्र सात साल की हो गई है. उसका नाम मुन्नू रखा गया है. किस्मत कैसे बदलती है, इसका उदाहरण मुन्नू बन गया है. डेनमार्क से मुन्नू की नई मां आई और अब उसे अपने साथ विदेश ले जाने के लिए आई हैं. गोद लेने की लंबी प्रक्रिया पूरी होने के बाद डेनमार्क के एसबर्ग शहर में कृत्रिम अंग बनाने का काम करने वाली करीना लाइक रसमुसेन अपनी मां हेडा के साथ दिव्यांग मुन्नू को लेने यहां आई हैं.

गुरुवार को जब मासूम मुन्नू को नई मां करीना लाइक रसमुसेन को हैंडओवर किया गया तो उस समय जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्रा एवं राजकीय बाल गृह के अधीक्षक हरीश श्रीवास्तव मौजूद रहे. गोद लेने की सभी प्रक्रिया पूरी कराई गई. 22 मार्च तक करीना लाइक रसमुसेन, उनकी मां हेडा और मासूम दिव्यांग प्रयागराज में ही रहेंगे. 22 को दिल्ली जाएंगे, जहां वीजा की प्रक्रिया होगी और मध्य मार्च में मुन्नू अपने नए परिवार के साथ नए देश में नई जिंदगी शुरू करेगा.

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डेनमार्क से आई करीना लाइक रसमुसेन सिंगल पैरेंट हैं. उन्होंने दस साल पहले बच्चा गोद लेने के लिए आवेदन किया था. साल 2019 में पता चला कि उनका आवेदन मंजूर कर लिया गया है. मुन्नू दिव्यांग है. उसके घुटनों के नीचे पैर नहीं है और हाथ की उंगलियों में भी खराबी है. लेकिन अच्छी बात यह है कि उसे गोद लेने वाली करीना लाइक पिछले 25 वर्षों से कृत्रिम अंग बनाने और लगाने का काम कर रहीं हैं. सीडब्लूसी मो. हसन जैदी ने कहा कि गोद लेने की प्रक्रिया पूरी हो गई है.

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