संस्कृत की पढ़ाई कर कौशांबी जिले के रहने वाले योगेंद्र कुमार पांडेय ने कर्मकांड और संस्कारों की सीख ली. फिर कर्मकांड व सनातन संस्कृति के विस्तार का लक्ष्य लेकर अमेरिका के लिए गए. वहां विश्व शांति के लिए यज्ञ करते हुए तमाम कर्मकांड कराए. जब यह लगा कि स्वयं की आजीविका का भी कोई जरिया होना चाहिए, तब शाकाहारी रेस्टोरेंट खोल दिया. उनकी पहचान अब अनिवासी के रूप में है.

कौशांबी के करारी थाना अंतर्गत अरका महमदपुर में जन्मे योगेंद्र (33) ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में ली. फिर नैनी स्थित महर्षि महेश योगी आश्रम से शास्त्री की उपाधि ली. वर्ष 2011 में अमेरिका के महर्षि वैदिक सिटी फेयरफील्ड आयोवा गए. विश्व शांति के लिए अनुष्ठान-यज्ञ करते रहे. वहां महीने में छात्रवृत्ति के रूप में 15 हजार रुपये (इंडियन कैरेंसी में) मिलती थी. वर्ष 2015 में ट्रिनिटी पहुंचे. वहां 20 हजार रुपये छात्रवृत्ति मिलनी शुरू हुई. इसके बाद आजीविका के लिए स्थायी साधन बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया.

योगेंद्र ने कहा कि अमेरिका में शाकाहारी खाने की मांग है. दोस्तों के सहयोग से टेक्सास, फ्लोरिडा में वर्ष 2015 में ही अपना रेस्टोरेंट खोल दिया. नाम रखा दुर्गा एलएलसी रेस्टोरेंट। इसमें कर्नाटक और महाराष्ट्र के छह लोगों को रोजगार भी मिला है. महीने में छह से सात हजार डालर की बचत कर लेते हैं. यह भारतीय मुद्रा में तीन से चार लाख रुपये के बीच है.

योगेंद्र कुमार पांडेय

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