लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूर मरे, सरकार को पता नही, राहुल गांधी ने शायराने अंदाज में कसा तंज

भारत की केंद्र सरकार के पास ये जानकारी नही है कि मार्च में लगाए गए लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूरों की मौत हुई थी। बता दें की देश में कोरोना महामारी को लेकर केंद्र सरकार द्वारा 24 मार्च से देश में लॉकडाउन लगाया गया था। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने ख़ुद इस बात को स्वीकार किया कि सरकार के पास लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूर की मृत्यु हुई इसको लेकर कोई जानकारी नही है।

सोमवार से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ जिसमें विपक्ष ने लिखित रूप में श्रम मंत्रालय से पाँच सवाल पूछे थे। उनमें एक सवाल था, “लॉकडाउन के दौरान क्या हज़ारों मज़दूरों की मौत हुई थी. अगर ऐसा है तो इसकी विस्तृत जानकारी दी जाए।” इस सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई डेटा मौजूद नहीं है। सरकार से जब ये पूछा गया कि कितने मज़दूरों को मुआवज़ा दिया गया है,तो मंत्री का कहना था कि जब लॉकडाउन के दौरान मरने वाले मज़दूरों के बारे में कोई डेटा ही मौजूद नहीं है तो फिर मुआवज़ा देने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

राहुल का शायराने अंदाज में तंज़

सरकार के इस जवाब पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तंज़ करते हुए मोदी सरकार को निशाना बनाया। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हाँ मगर दुख है सरकार पे असर ना हुई, उनका मरना देखा ज़माने ने, एक मोदी सरकार है जिसे ख़बर ना हुई।”

आर्टिकल 14 नाम की एक वेबसाइट ने कहा कि उनके ज़रिए जमा किए गए आंकड़ों के अनुसार केवल चार जुलाई तक 971 लोगों की मौत हुई थी। उनके अनुसार 216 लोग भूख से, 219 लोग अपने घरों को जाते हुए रास्ते में दुर्घटना से मौत हुई थी और 133 लोगों ने आत्महत्या की थी।

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