मोदी सरकार के पास लॉकडाउन में मरे प्रवासी मजदूरों का कोई आंकड़ा नहीं

सोमवार को शुरू हुए मानसून सत्र में संसद एक सवाल के जवाब में भारत  सरकार ने कहा है कि उसके पास लॉकडाउन के दौरान कितने प्रवासी मज़दूर मारे गए हैं, इसे लेकर कोई आंकड़ा उनके पास उपलब्ध नहीं है।

संसद में जब सरकार से यह पूछा गया कि क्या लॉकडाउन के दौरान मारे गए प्रवासी मज़दूर के परिवारों को किसी भी तरह का मुआवजा दिया गया है तो सरकार का जवाब था कि यह सवाल ही नहीं उठता है जब मरने वाले लोगों का कोई आंकड़ा ही नहीं उपलब्ध है।

इस बार संसद का मॉनसून सत्र कोरोना की वजह से देर से शुरू हुआ है और इसमें कई तरह के बदलाव किए गए हैं। इस बार संसद के इस सत्र में प्रश्न काल की कार्यवाही को स्थगित किया गया है।

सरकार से कुछ सवाल पूछे गए जिसका सरकार ने लिखित जवाब मुहैया कराया है। इस पर सरकार का जवाब था कि भारत ने एक राष्ट्र के तौर पर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी समूहों, स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों, सैनिटाइजेशन वर्कर्स, गैर-सरकारी संगठनों की मदद से कोविड-19 और देशभर में लगे लॉकडाउन से पैदा हुए अप्रत्याशित मानवीय संकट का सामना किया है।

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