सैदाबाद थाने के मनोहरापुर गांव की सरोज बस्ती के लोग मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाते हैं. उनके पास खेत भी इतना नहीं है कि खेती करके जीवनयापन कर सकें. अधिक दुखों का पहाड़ जवाहरलाल के बच्चों पर टूटा है. जवाहर लाल के चार बच्चों में बेटी श्रीमती (24वर्ष) और नीलम (20वर्ष) की शादी हो चुकी है. छोटी बेटी कोमल (15वर्ष) घर पर माता-पिता के साथ रहती थी. बेटा दीपक (13वर्ष) महीने भर पहले बड़ी बहन के घर सूरत चला गया था. कोमल इंटरमीडिएट की छात्रा है जबकि दीपक हाईस्कूल का छात्र है. जहरीली शराब पीने से पिता जवाहरलाल व मां सुनीता देवी की मौत से कोमल व दीपक अनाथ हो गए. अब दोनों बच्चों को अपनी बड़ी बहनों का ही सहारा है.

गांव का ही राम प्रसाद दिल्ली में रहकर प्लंबरिंग का काम करता था. साल भर पहले कोरोना महामारी के चलते लाकडाउन में घर चला आया था, तब से यहीं पर मजदूरी व खेती करता था. इसके तीन बच्चे प्रदीप (17), संधना (14) व राज (10) है. प्रदीप दिल्ली में मजदूरी करता है. संधना कक्षा नौ व राज कक्षा सात का छात्र है. राम प्रसाद की पत्नी नीता देवी विलाप करते-करते बार-बार बेहोश हो जाती है. सबसे यही कहती है कि उसकी तो दुनिया ही उजड़ गई. पूरे परिवार का खर्च उसके पति ही चलाते थे. अब बेटे प्रदीप का ही सहारा है.

विजय कुमार भी मजदूरी कर पूरे परिवार का खर्च चलाता था. विजय के चार बच्चे अंकित (15), निखिल (12), सोनाली (10), रेशमा (8) हैं. अंकित कक्षा 12, निखिल सात, सोनाली तीन व रेशमा कक्षा दो में पढ़ती है. विजय की पत्नी निर्मला यह कहकर रोने लगी कि पति की मौत से पूरा परिवार टूट गया है. अब घर का खर्च कैसे चलेगा, बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी, ऐसे ही सवालों से उसकी जिंदगी घिरी है. वह लगातार आंसू बहा रही है.

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