प्रयागराजः जिले में 11 साल की मासूम की हत्या के मामले से पुलिस ने पर्दाफाश किया है. सराय इनायत थाना क्षेत्र के चकिया धरहरा गांव में तीन जुलाई को तड़के 11 साल की बच्ची की नृशंस हत्या कर दी गई थी. पुलिस ने पड़ोस के रहने वाले झोलाछाप डॉक्टर विक्रम सिंह को गिरफ्तार कर लिया. उसका एक अभी भी साथी फरार है. उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है. पुलिस का कहना है कि बच्ची ने अपनी एक नजदीकी रिश्तेदार और विक्रम को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था. इसी कारण विक्रम ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी. पुलिस का कहना है कि झाड़ियों में बच्ची के शव के अधिकांश हिस्सों को जानवरों ने खा लिया था, इसी कारण उसका हाथ अलग हो गया था.

जिले के गंगापार इलाके में सरायइनायत थाना क्षेत्र के चकिया धरहरा गांव निवासी बलवंत भारतीय की 11 वर्षीय पुत्री श्रद्धा अपनी मां के साथ 3 जुलाई को बाग में आम बीनने गई थी. उसके साथ उसका छोटा भाई भी था. वह आम बीन रही थी कि तभी उसकी मां उसके भाई को लेकर घर चली गई. थोड़ी देर बाद जब वह वापस घर लौटी तो श्रद्धा गायब थी. बहुत खोजबीन की गई, लेकिन कुछ पता नहीं चला. दूसरे दिन उसकी लाश आम के बाग के पास स्थित तालाब के किनारे झाड़ियों में मिली. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया तो दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई.

पुलिस की जांच पड़ताल में पता चला कि उसकी हत्या गांव के ही विक्रम सिंह ने अपने साथी अर्जुन उर्फ राजू पटवा के साथ मिलकर की थी. विक्रम सिंह गांव के पास ही क्लीनिक चलाता है. पूछताछ में उसने बताया कि श्रद्धा की मां के साथ उसका अफेयर चल रहा था. 2 जुलाई की रात में वह राजेंद्र पटवा के साथ अपनी क्लीनिक पर सोया था. भोर में 3 बजे उसने अपनी माशूका को मिलने के लिए आम की बाग में बुलाया था. श्रद्धा आम बीन रही थी और उसका छोटा भाई शौच करने चला गया. उसी दौरान विक्रम सिंह श्रद्धा की मां के साथ पेड़ की ओट में प्रेमालाप कर रहा था. श्रद्धा ने उन दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया, जिसके बाद उसकी मां शर्म के मारे वहां से अपने बेटे को लेकर घर चली गई. बेटी श्रद्धा बाग में ही रह गई.

दूसरी तरफ विक्रम सिंह को लगा कि श्रद्धा गांव जाकर उन लोगों को उसकी काली करतूत बता देगी. विक्रम ने अपने साथी राजेंद्र पटवा के साथ मिलकर उसे पकड़ा और नाक व मुंह दबाकर उसका गला घोट दिया. जब उसकी मौत हो गई तो उसकी लाश को पास के तालाब के किनारे झाड़ी में फेंक दिया. कुछ देर बाद जब श्रद्धा की मां बाग में पहुंची तो उन लोगों ने बताया कि वह श्रद्धा के बारे में कुछ नहीं जानते. जिसके बाद श्रद्धा की खोजबीन शुरू हो गई.

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