आज अयोध्या के विवादित ढांचे पर आएगा फैसला

अयोध्या में ढांचा विध्वंस के 28 साल पुराने मामले में फैसले की घड़ी आ गई है। 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहाने के कथित षड्यंत्र भड़काऊ भाषण और पत्रकारों पर हमले के 49 मुकदमों में अदालत की कार्यवाही बुधवार सुबह 10:00 बजेे शुरू होगी।

इन बीते 28 वर्षों में 49 अभियुक्तों में से 17 की मौत हो चुकी है लगभग 50 गवाह भी दुनिया से विदा हो चुके हैं। इस मामले में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी मुरली मनोहर जोशी कल्याण सिंह उमा भारती विनय कटियार साध्वी ऋतंभरा महंत नृत्य गोपाल दास डॉ रामविलास वेदांती चंपत राय महंत धर्मदास पवन कुमार पांडे और स्वामी साक्षी महाराज समेत कुल 32 अभियुक्तों पर फैसला सुनाया जाएगा। इन लोगों पर आखिरी फैसला सुनाया जाएगा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिए विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल 30 सितंबर तक बढ़ाया था फैसला उसी हाईकोर्ट परिसर में सुनाया जाएगा जिसमें करीब 10 वर्ष पहले अयोध्या के दीवानी मामले का निर्णय सुनाया गया था।

राम मंदिर पर फैसला आने के लगभग 11 महीने के बाद उस स्थान पर बने ढांचे को गिराने के मामले में बुधवार को आने वाला फैसला न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश की राजनीतिक बिसात पर नए सिरे से सियासी मोहरे सजाएगा। एक तरफ जब लालकृष्ण आडवाणी को 1990 में कारसेवा के लिए अयोध्या आते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रास्ते में गिरफ्तार करा दिया था। जाहिर है कि अब इस फैसले पर बिहार में राजग में राजद के बीच सियासी बिसात जरूर बिछेगी। विश्व हिंदू परिषद और भाजपा नेताओं को सजा होती है तो विपक्ष की तरफ से भगवा आतंकवाद का मामला फिर से उछाला जा सकता है। प्रज्ञा ठाकुर असीमानंद कर्नल पुरोहित जैसे मामलों को विपक्ष अपना हथियार बना सकती है।

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