union health minister mansukh mandaviya said no one corona patients died due to lack of oxygen

रिपोर्ट- उमेश कुमार (पत्रकार)

कोरोना की दूसरी लहर की कुछ तस्वीरें आप सबके जहन में होंगी. कैसे नहीं होगी. हर किसी ने अपने जानने वालों को जो खोया है. फिर भी चलिए कुछ तस्वीरों पर बात करते हैं….

आगरा के श्रीराम अस्पताल के बाहर एक महिला रिक्शे पर अपने पति के साथ थी. एक हाथ में पानी की बोतल और दूसरे हाथ से पति का सिर थामें अपने गोद में रख कर पति को अपनी सांस देकर जिंदा रखने की कोशिश करती. पर रेणु सिंघल हार गईं थी, सुहाग को जिंदा रखने में. क्या इसको झुठलाया जा सकता है. पर ऐसा हुआ. 20 जुलाई को राज्यसभा में. देश में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के सवाल पर केंद्र सरकार में नए स्वास्थ्य मंत्री बने मनसुख मंडाविया ने राज्यसभा में लिखित जवाब दिया. जरा जवाब पर गौर करिए, “किसी भी राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था का काम राज्य सरकार देखती है, स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए सभी राज्य और केंद्र शासित राज्य रोजाना कोरोना के केस और इससे होने वाली मौतों की जानकारी मंत्रालय को देते हैं. हालांकि किसी भी राज्य और केंद्र शासित राज्य में ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत की जानकारी नहीं मिली है.”

चलिए इस तस्वीर को मंत्री साहब ने झुठला दिया. चलो साहब को दूसरी तस्वीर के बारे में बताते हैं. देश के सबसे बड़े आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश का कोरोना की दूसरी लहर में क्या हाल था, ये प्रदेशवासियों से छुपा नहीं है. फिर भी मंत्री जी को एक तस्वीर की याद दिलाने की जरूरत है. स्वास्थ्य मंत्री को लखनऊ के भैंसाकुंड श्मशान घाट की वो तस्वीर फिर से दिखानी चाहिए, जब घाट पर एक लाइन से चिताएं जल रही थी, हां ये बात और की अगले ही दिन प्रशासन ने टिनसेड लगा कर श्मशान घाट को छिपा दिया गया था, लेकिन वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर एक के बाद एक चिताओं का जलाना बदस्तूर जारी रहा. ऐसा ही कुछ प्रयागराज के फाफामऊ, दारागंज, शंकरघाट का भी हाल रहा. जहां आम दिनों के मुकाबले दूसरी लहर में अधिक तदाद में शवों का अंतिम संस्कार हो रहा था.

कोरोना में जलती लाशें

अगर इस तस्वीर को झूठा साबित कर दिया गया तो, गंगा में उतराते शव, और रेती में दफन शवों के दिखने की तस्वीरें तो झूठी नहीं हो सकती है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री के बयान से ऐसा नहीं लगता है. अगर केंद्र सरकार के बयान को सच मना जाए तो उन तस्वीरों का क्या जब अस्पताल के बाहर रोते-बिलखते लोगों ऑक्सीजन की कमी के चलते अपनों को खो रहे थे. कई अस्पताल के डॉक्टरों तक ने कह दिया था कि, अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी थी. 30 अप्रैल को गुरुग्राम के कृति अस्पताल में ICU में भर्ती 6 मरीजों की मौत हो गई थी.

सभी को अस्पताल के बेड पर लेटे और हाथ में मास्क पकड़े यूट्युबर राहुल वोहरा का बोला गया आखिरी अल्फाज तो शायद मंत्री जी को याद होगा. नहीं याद तो बताते हैं कि हांफते हुए राहुल वोहरा ने कहा था कि, ” इसकी बड़ी कीमत है आज के टाइम में इसके बिना मरीज छटपटा जाता है….कुछ नहीं आता इसमें..कुछ भी नहीं आ रहा है इसमें.” 8 मई को उन्होंने आखिरी पोस्ट लिखा, मुझे भी ट्रीटमेंट अच्छा मिल जाता तो मैं भी बच जाता, तुम्हारा राहुल वोहरा…9 मई को राहुल वोहरा की मौत हो गई. बता दें कि कोरोना की पहली लहर के दौरान 3095 मीट्रिक टन की तुलना में दूसरी लहर में लगभग 9000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग बढ़ी थी. बोकारो से यूपी में ऑक्सीजन लाने के लिए ‘ऑक्सीजन एक्सप्रेस’ तक चलाई गई.

यूपी के मुरादाबाद में एक निजी अस्पताल में 29 अप्रैल को ऑक्सीजन की कमी से कोविड के 6 मरीजों की मौत हो गई थी. 11 मई को गोवा मेडिकल कॉलेज में 26 मरीजों की मौत हो गई थी. स्वास्थ्य मंत्री ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा था कि, “मैं बाम्बे हाईकोर्ट से जांच करने का अनुरोध करता हूं, कि क्या कुप्रबंधन या ऑक्सीजन की कमी से मौतें हुईं. राणे ने कहा था कि , हमें 1200 जंबो सिलेंडर चाहिए, लेकिन हमें केवल 400 मिले. देश की राजधानी दिल्ली में 1 मई को बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 12 मरीजों की मौत हुई थी. अस्पताल के एमडी एससीएल गुप्ता ने अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की पुष्टि की थी.

केंद्र सरकार का ये दावा कि ऑक्सीजन की कमी से कोई जान नहीं गई, तो ये सिर्फ एक मजाक लगता है. जो बेबसी के आंसुओं को झूठा साबित करने की झूठी कोशिश है. साथ ही उन चीखों और उखड़ चुकी सांसों का मजाक बनाया गया, जिन्होंने जिंदा रहने के लिए हाथ जोड़े थे, मदद के लिए पैर पकड़े थे. गिड़गिड़ाते हुए ऑक्सीजन के लिए रोते हुए भीख मांगी थी.

 

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