कोरोना महामारी में स्कूल बन्द होने की वजह से बच्चो की शिक्षा पर क्या पड़ रहा है बुरा असर

दुनियाभर में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसी परिस्थिति में स्कूली छात्रों के अभिभावकों की चिंताओं ने भी विश्वव्यापी मुद्दे का रूप ले लिया है। यूनेस्को का अनुमान है कि कोरोना महामारी के कारण विश्व के करीब 190 देशों में किए गए लॉकडाउन के चलते शैक्षिक संस्थाओं के बंद होने का 154 करोड़ छात्र पर गंभीर असर हुआ है। जहां तक भारत का सवाल है। अभी भी अभिभावक अपने बच्चों को कम से कम आने वाले महीनों में स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं है।

भारत में स्कूल कब खुलेंगे इसे लेकर बराबर कयास लगाए जा रहे हैं मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस मुद्दे पर राज्य मंत्री तथा शिक्षा अधिकारियों के साथ कई बार बैठकें कर चुकें है। कोरोना वायरस के संक्रमण के रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों के तहत देशभर में 16 मार्च से 1.5 लाख स्कूल बन्द हैं और क़रीब 25 करोड़ बच्चे स्कूल बन्द होने से प्रभावित है। देश में स्कूल कब खुलेंगे? इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन देश में जिस तरह से कोरोना मरीजों का आंकड़ा रोज़ बढ़ रहा है। इसके चलते यह फ़ैसला लेना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।

ऐसे हालात में अगर स्कूल खोल लिया गया तो कोरोना वायरस पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा। देश में सरकारी स्कूलों में एक ही सेक्शन में इतने बच्चे होते हैं कि सामाजिक दूरी वाले नियम का पालन मुमकिन नही होगा। अभिभावको पर किए गए एक सर्वे में खुलासा किया गया है कि ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। यह भी गौर करने वाला बिंदु है कि बच्चों के लिए स्कूल महज पढ़ने वाला स्थान ही नहीं होते हैं। उन्हें वहां पौष्टिक आहार स्वास्थ्य साफ-सफाई जैसी सेवाएं भी मुहैया कराई जाती है। मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक सहयोग भी उपलब्ध कराया जाता है। स्कूल जाने से बच्चों के बीच में पढ़ाई छोड़ने की संभावना कम होती है खासकर लड़कियों के मामले में उनकी जल्दी शादी होने अवसर भी कम हो जाते हैं।

“यूनेस्को की शिक्षा सहायक महानिदेशक स्टीफिना गिनोनी ने एक समाचार एजेंसी को दिए गए साक्षात्कार में बताया कि कोविड-19 महामारी के कारण स्कूल बंद करने वाले निर्णय बीच में स्कूल छोड़ने वालों में वृद्धि की संभावना और गैर अनुपातिक तौर से किशोर लड़कियों को अधिक प्रभावित करेगा शिक्षा में लैंगिक फासला को बढ़ाएगा और यौन शोषण, छोटी आयु में गर्भधारण करने और छोटी आयु में जबरन विवाह वाले मामलों मेंभी बढ़ोतरी आएगी, जिससे सावधान रहने की जरूरत है।”

इसके अलावा स्कूल बंद होने से सबसे अधिक गरीब मुल्कों के बच्चों के बारे में भी पता होना चाहिए। इन मुल्कों के बच्चों को दिन में केवल एक समय का ही भोजन मिलता था। वह स्कूल में ही मिलने वाला भोजन था। कोविड-19 के कारण स्कूल बन्द होने से दुनिया भर में तकरीबन 3.700 लाख बच्चे स्कूल में मिलने वाले इस पौष्टिक आहार को नहीं ले पा रहें हैं जो गरीब परिवारों के बच्चों के लिए जीवन रेखा है।

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